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Saturday, February 17, 2018

वेब ब्राऊजर

सन १९९१ में टिम बर्नर ली ने कई तकनीकों के संयुक्त प्रयोग से मिलाकर वेब ब्राउजर की नींव रखी थी। इस वेब ब्राउजर का नाम वर्ल्ड वाइड वेब रखा गया था, जिसे लघुनाम में डब्ल्यु.डब्ल्यु.डब्ल्यु भी कहते हैं। पृष्ठको यूआरएल (यूनीफॉर्म रिसोर्स लोकेटर) के रूप में लोकेट किया जाता है और यही यू.आर.एल वेब पते के तौर पर जाना जाता है। इस वेब पते का आरंभ अंग्रेज़ी के अक्षर-समूह एच टी टी पी से होता है। कई ब्राउजर एचटीटीपी के अलावा दूसरे यूआरएल टाइप और उनके प्रोटोकॉल जैसे गोफर, एफटीपी आदि को सपोर्ट करते हैं।

वेब एक विशाल पुस्तक की तरह है तथा वेब ब्राऊजर एक सॉफ्टवेयर है जो कम्प्यूटर को इंटरनेट से जोड़ता है । यह बहुत ही महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर है । ब्राऊजर वर्ड वाइड वेब पर साइट देखने का एक सामान्य साधन है । इन सॉफ्टवेयर का उपयोग कर हमलोग

वर्ल्ड वाइड वेब- World Wide Web (www) & एवं कार्यप्रणाली

वर्ल्ड वाइड वेब या विश्व व्यापी वेब (जिसे सामान्यत: वेब कहा जाता है) आपस में परस्पर जुड़े हाइपरटेक्स्ट दस्तावेजों को इन्टरनेट द्वारा प्राप्त करने की प्रणाली है। एक वेब ब्राउजर की सहायता से हम उन वेब पन्नों को देख सकते हैं जिनमें टेक्स्ट, इमेज , वीडियो, एंवं अन्य मल्टीमीडिया होते हैं तथा हाइपरलिंक की सहायता से उन पन्नों के बीच में आवागमन कर सकते है। विश्व व्यापी वेब को टिम बर्नर्स ली द्वारा 1989 में यूरोपीय नाभिकीय अनुसंधान संगठन जो की जेनेवा, स्वीट्ज़रलैंड में है, में काम करते वक्त बनाया गया था और 1992 में जारी किया गया था। उसके बाद से बरनर्स-ली नें वेब के स्तरों के विकास (जैसे की मार्कअप भाषाएँ जिनमें की वेब पन्ने लिखे जाते हैं) में एक सक्रीय भूमिका अदा की है और हाल के वर्षों में उन्होनें सीमेंटिक (अर्थ) वेब (Semantic Web) विकसित करने के अपने स्वप्न की वकालत की है।

Friday, February 16, 2018

कंप्यूटर के अनिवार्य पार्ट्स

एक Personal Computer को बनाने में बहुत से पुर्जो की आवश्यकता होती है। जिसमे कुछ पार्ट्स ऐसे है जिनके बगैर कंप्यूटर को नहीं बनाया जा सकता है। इन्ही पार्ट्स को कंप्यूटर के अनिवार्य पार्ट्स कहते है

कैबिनेट (CABINET)

कंप्यूटर सभी पार्ट्स को एक जगह व्यवस्थित करने के लिए एवं  उनको सुरक्षित  रखने के लिए सीपीयू कैबिनेट का प्रयोग किया जाता है। यह कई तरह के एवं कई  आकर के मिलते है।

मॉनिटर (MONITOR)

मॉनिटर जहाँ पर कंप्यूटर में सभी होने वाले कार्य  को प्रदर्शन होता  है। यह कई प्रकार के एवं कई  साइज में मिलते है।

पावर सप्लाई (SMPS POWER SUPPLY) 

कंप्यूटर के सभी पार्ट्स को काम करने के लिए एक निश्चित विधुत आपूर्ति की अवश्यकता होती है। जिसके लिए एक विशेष प्रकार की सप्लाई का प्रयोग करते है जिसको एसएमपीएस कहा जाता है। यह कंप्यूटर के हर पार्ट्स को उनकी जरूरत के हिशाब से पावर देता है। इसके साथ ही कही पर शॉर्टिंग या ओवरलोड होने पर बंद होकर सुरक्षा भी देता है। यह सप्लाई सोफ्टवेयर के द्वारा कंप्यूटर को बंद (Shut-Down) भी किया जा सकता है।



मदर बोर्ड (MOTHER BOARD) 

मदरबोर्ड  में बहुत सारे सॉकेट स्लॉट और पोर्ट्स होते है। माइक्रो प्रोसेसर को भी इसी मदरबोर्ड के ऊपर बने सीपीयू सॉकेट में लगाया जाता है। इसके बिना कंप्यूटर बनाना असंभव है क्यूंकि इससे  ही कंप्यूटर के ज्यादातर (लगभाग सभी ) पार्ट्स को जोड़ा जाता है।

माइक्रो प्रोसेसर  (MICROPROCESSOR )

माइक्रो प्रोसेसर  जिसे सिपीयु भी  कहते है। माइक्रो प्रोसेसर कम्पूटर का  एक महत्वपूर्ण पार्ट्स होता है। क्यूंकि माइक्रो प्रोसेसर मदरबोर्ड पर लगे सभी हार्डवेयर पार्ट्स को कंट्रोल करता है। और कंप्यूटर के सारे काम इसी के द्वारा संपन्न होते है। कंप्यूटर की स्पीड और गुणवत्ता इसी पर निर्भर करती है। प्रोसेसर के अनुसार ही मदरबोर्ड का चयन किया जाता है। 

हार्ड डिस्क ड्राइव  (HARD DISK DRIVE )


हार्ड डिस्क ड्राइव एक तरह की मेमोरी होती है। इसमें डेटा स्थायी रूप से सेव रहता है। इसी के अंदर ही कंप्यूटर के ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ्टवेयर को इनस्टॉल करते है। यह कई तरह के क्षमता के आते है। 



सीपीयू हीट शिंक और फैन  (CPU HEAT SINK AND FAN )

सीपीयू हीट शिंक और फैन के बगैर कंप्यूटर नहीं चल सकता है। क्यूंकि जब कंप्यूटर को ओन करते है तो माइक्रो प्रोसेसर बहुत ज्यादा गरम हो जाता है। यदि प्रोसेसर का कोर बहुत अधिक गरम होगा तो कंप्यूटर चलते चलते बंद हो जायेगा या फिर ओन ही नहीं होगा। इसलिए प्रोसेसर को ठंडा रखने के लिए उसके ऊपर अलमुनियम या कॉपर की हीट शिंक और पंखा लगाया जाता है। 


रैम (RAM - RANDOM ACCESS MEMORY ) 

रैम का भी कंप्यूटर में अहम भूमिका होती है। इसके बगैर कंप्यूटर ओन तो हो जायेगा लेकिन डिस्प्ले नहीं आएगा। क्यूंकि प्रोसेसर रैम के द्वारा ही बायोस को पढ़कर सभी काम करता है। यह एक अस्थायी मेमोरी होती है। जब तक इसको सप्लाई मिलती है तब तक ही इसमें डेटा सेव रहता है। सप्लाई नहीं मिलने पर इसका सेव डेटा औने आप मिट जाता है। 


कीबोर्ड और माउस (KEYBOARD MOUSE)

 कंप्यूटर को ऑपरेट करने के लिए कीबोर्ड और माउस का उपयोग किया जाता है। कंप्यूटर को इंस्ट्रक्शंस को कीबोर्ड पर लगे बटन को दबाकर देते है। जिसको कंप्यूटर समझ कर काम करता है। 

Know About - कैसे मोबाइल फोन से ले स्‍कैनर का काम

अधिकतर कामों में  डॉक्‍यूमेन्‍ट को स्‍कैन करने  की आवश्‍यकता पडती  रहती है. कोई डॉक्‍यूमेन्‍ट, पेपर, लैटर आदि को  ई-मेल(E-mail) के माध्‍यम से भेजने के लिए स्‍कैन की आवस्यकता पड़ती है. आमतौर पर यह कार्य  स्‍कैनर(Scanner) के माध्यम  से  किया जाता  है, परन्तु यह हर जगह उपलब्ध नहीं हो सकता है .  लेकिन अगर  पास में  एक एन्‍ड्राइड फोन  है  तो  बडे ही आसानी से इस  फोन  को स्‍कैनर में बदल सकते हैं.

एन्‍ड्राइड  फोन  को  कैसे स्‍कैनर में बदले  -


  1. पहले फोन पर  गूगल प्‍ले स्‍टोर  से Cam Scanner HD को डाउनलोड करे  ।
  2. Cam Scanner HD  डाउनलोड होने के बाद cam Scanner  को ओपन करे ।
  3. अब Cam Scanner का  Capture बटन दबाइये
  4. जिस भी पेज को स्‍कैन करना  है उसे टेबल पर सीधा रखे और Capture कर ले , Capture की हुई इमेज को दी हुऐ बिन्‍दुओ से चारो ओर से मिलाये और OK कर दे ।
  5.  अब  इस Capture की हुई इमेज को कही भी ई मेल के द्वारा भेज सकते है।
  6. यदि  चाहे तो Cam Scanner का प्रयोग कर इमेज को PDF Format में भी बदल सकते है। 

Thursday, February 15, 2018

कम्पूटर में समान्य "की बोर्ड" से हिंदी में टाइप करना

कम्पूटर में समान्य “की बोर्ड” से हिंदी में टाइप मुख्य रूप से दो तरह से की जाती है. 

1. फंट बेस टाइपिंग 

2. इनपुट मेथड एडीटर . 

1. फंट बेस टाइपिंग - कम्पूटर में लिखने के लिए फंटस का उपयोग किया जाता है. हिंदी फंटस का उपयोग करके हिंदी में डाकुमेन्ट टाइप कर सकते है. बस इसके लिए फंट स्टाइल से पसंद का हिंदी फंट चुनना पडता है इससे  “की बोर्ड” का लेआउट हिंदी में बदल जाता है. फंट बेस टाइपिंग में  परेशानी ये होती है कि पहले हिंदी टाइपिंग आनी चाहिए. अगर हिंदी टाइपिंग नही जानते है, तो काफी परेशानी आती है. इसलिए ये तरीका उन्हीं लोगों के लिए उपयोगी होता है. जिन्होंने पहले ही टाइप राइटर पर हिंदी टाइपिंग सीखी हुई है. नये यूजर के लिए फंट बेस्ड हिंदी टाइपिंग के बजाए दूसरे विकल्प (इनपुट मेथड एडीटर) का इस्तेमाल हिंदी टाइप के लिए उपयोगी होती है .

Monday, February 12, 2018

यूपीएस (UPS ) एवं कार्यप्रणाली



UPS - UPS का पूरा नाम अबाधित विद्युत आपूर्ति (Uninterruptible Power Supply) है । UPS ऐसा यंत्र है जो कंप्यूटर के साथ जोड़ा जाता है और कंप्यूटर को विधुत पॉवर के जाने के बाद भी कुछ देर के लिए काम करने की सुविधा देता है. साथ ही ये आपके कंप्यूटर को बिजली के तेज आवेग से भी बचाता है. यह बैटरी से संचालित उपकरण है जिसके द्वारा कम्प्यूटर में अनवरत विद्युत आपूर्ति बनी रहती है । यह कंप्यूटर को तब पॉवर देता है जब अचानक मुख्य सप्लाई से पॉवर कट जाती है ।यह एक ऐसा उपकरण होता है जो विद्युत से चलने वाले किसी उपकरण को उस स्थिति में भी सीमित समय के लिये विद्युत की समुचित आपूर्ति सुनिश्चित करता है जब आपूर्ति के मुख्य स्रोत (मेन्स) से विद्युत आपूति उपलब्ध नहीं होती।

Saturday, February 10, 2018

कंप्यूटर का इतिहास

कंप्यूटर की शब्द व्युत्पत्ति
कंप्यूटर शब्द का प्रथम प्रयोग वर्ष १६१३ में अंग्रेज लेखक रिचर्ड ब्रेथवेट की पुस्तक '"द यंग मैन ग्लीनिंग्स"' में पाया गया। मैंने समय के सबसे सही कम्प्यूटरों को और धरा पे जन्मे सर्वोत्तम अंक गणितज्ञ को पढ़ा है। ]यह उस व्यक्ति के बारे में बताता है जो गणनाएँ (computations) करता था, तभी से यह शब्द २०वी शताब्दी के मध्य तक इस सन्दर्भ में हूबहू प्रयोग होता आ रहा है। उन्नीसवी शताब्दी के अंत से इस शब्द ने और ज्यादा व्यवहारिक रूप ले लिया, यानी कि वो यन्त्र जो गणनाएँ करता है। संगणक व अभिकलित्र नाम  भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी किये गए हैं।

कम्प्यूटर पेरिफ़ेरल डीवाईस

कम्प्यूटर पेरिफ़ेरल डीवाईस (परिधीय यंत्र)

कम्प्यूटर पेरिफ़ेरल डीवाईस ऐसा यंत्र है जिसके द्वारा संगणक (कम्प्यूटर) में सूचना पहुँचाई जाती है या संगणक से बाहर पहुँचाई जाती है।

कम्प्यूटर पेरिफ़ेरल डीवाईस मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:

निवेश यंत्र (Input Devices) - जो प्रयोगकर्ता या किसी अन्य प्रणाली के संग काम कर के सूचना संगणक में पहुँचाते हैं। इनमें माउस और कुंजीपटल(कीबोर्ड) शामिल हैं।

निर्गम यंत्र (output devices) - जो संगणक से प्रयोगकर्ता या किसी अन्य प्रणाली तक सूचना पहुँचाते हैं। इनमें मॉनीटर और प्रिंटर शामिल हैं।

निवेश/निर्गम यंत्र (input/output devices) - यह सूचना दोनों दिशाओं में ले जाने का काम करते हैं। स्पर्श पटल (टच स्क्रीन) इनमें शामिल हैं।

Friday, December 22, 2017

Friday, November 3, 2017

Know About - कंप्यूटर कीबोर्ड की F1 से F12 Keys का प्रयोग

 जाने कंप्यूटर कीबोर्ड में दी गई F Keys ,  F1 से लेकर F12 तक के  बटन्स  के  फंक्शन्स - 

Image result for कीबोर्ड की F1 से F12 Keys का प्रयोग

F Keys का  इस्तेमाल -

F1: जब भी आप किसी प्रोग्राम में काम कर रहे होते हैं और उसमें आपको किसी भी तरह की मदद चाहिए तो यह Key प्रेस कर सकते हैं। इससे