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Thursday, January 22, 2009

आपरेटिंग सिस्टम (Operating System) & आपरेटिंग सिस्टम की विशेषताए

आपरेटिंग सिस्टम
कम्प्यूटर सिस्टम के हार्डवेयर रिसोर्सेस (Hardware Resources), जैसे- मेमोरी (Memory), प्रोसेसर (Processor) तथा इनपुट-आउटपुट डिवाइसेस (Input-Output Divices) को व्यवस्थित करने के लिये बनाया गया सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software) ही आपरेटिंग सिस्टम (Operating System) होता है। यह व्यवस्थित रूप से जमे हुए सॉफ्टवेयर्स का समूह होता है जो कि आंकडो (data) एवं निर्देश (commands) को नियंत्रित करता है। कम्प्यूटर के प्रत्येक रिसोर्स की स्थिति का लेखा - जोखा आपरेटिंग सिस्टम ही रखता है, आपरेटिंग सिस्टम ही निर्णय करता है कि किसका, कब और कितनी देर के लिए कम्प्यूटर रिसोर्स पर नियंत्रण होगा।
आपरेटिंग सिस्टम हमारे तथा कम्प्यूटर के बीच एक माध्यम का कार्य करता है। इसके अलावा यह हार्डवेयर्स (Hardwares) तथा सॉफ्टवेयर्स (Softwares) के मध्य एक सेतु का कार्य भी करता है। आपरेटिंग सिस्टम के बिना कम्पयूटर का अपने आप मे कोई अस्तित्व ही नही है। यदि आपरेटिंग सिस्टम न हो तो कम्प्यूटर अपने हार्डवेयर्स जैसे कि कुंजीपटल (Keyboard), मानिटर (Monitor), सीपीयू (CPU) आदि के बीच कभी भी सम्बंध स्थापित नहीं कर पायेगा। आपरेटिंग सिस्टम किसी कम्प्यूटर प्रयोग करने वाले को इस जहमत से बचाता है कि वह कम्यूटर के समस्त भागो की जानकारी रखे।

आपरेटिंग सिस्टम के कार्य

आपरेटिंग सिस्टम अनेक प्रकार के उपयोगी कार्य करता है जिनमें से कुछ प्रमुख कार्य नीचे दिये जा रहे हैं:

फाइल पद्धति (File System) - 

फाइल बनाना, मिटाना तथा फाइलों को एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाना और फाइल निर्देशिका को व्यवस्थित करना।

प्रक्रिया (Processing) -

कार्यक्रमों (Programs) और आँकडों (Data) को मेमोरी मे बाँटना, प्रक्रिया (Process) को आरम्भ करके समुचित रूप से चलाना।

इनपुट/आउटपुट (input/output) -

 सीपीयू और मानिटर (Monitor), प्रिंटर (Printer), डिस्क (Disk) आदि के बीच मध्यस्थता करना।

आपरेटिंग सिस्टम के प्रकार

वैसे तो विभिन्न कालों में विभिन्न आपरेटिंग सिस्टमों का निर्माण हुआ पर प्रमुख रूप से प्रयोग किये जाने वाले लोकप्रिय आपरेटिंग सिस्टम की सूची नीचे दी जा रही है:
लिनक्स (Linux)
मैक एस (MacOS)
एमएस डाज (MS-DOS)
आईबीएम ओएश/2 (IBM OS/2)
यूनिक्स (Unix)
विन्डोज सीई (Windows CE)
विन्डोज 3.x (Windows 3.x)
विन्डोज 95 (Windows 95)
विन्डोज 98 (Windows 98)
विन्डोज 98 एस ई (Windows 98 SE)
विन्डोज एमई (Windows ME)
विन्डोज एनटी (Windows NT)
विन्डोज 2000 (Windows 2000)
विन्डोज एक्सपी (Windows XP)
विन्डोज व्हिस्टा (Windows Vista)

आपरेटिंग सिस्टम की विशेषताए

1)मेमोरी प्रबंधन

प्रोग्राम एवं आकडो को क्रियान्वित करने से पहले मेमोरी मे डालना पडता है अधिकतर आपरेटिंग सिस्टम एक समय मे एक से अधिक प्रोग्राम को मेमोरी मे रहने की सुविधा प्रदान करता है आपरेटिंग सिस्टम यह निश्चित करता है कि प्रयोग हो रही मेमोरी अधिलेखित न हो प्रोग्राम स्माप्त होने पर प्रयोग होने वाली मेमोरी मुक्त हो जाती है ।

2) मल्टी प्रोग्रामिंग

एक ही समय पर दो से अधिक प्रक्रियाओ का एक दूसरे पर प्रचालन होना मल्टी प्रोग्रामिंग कहलाता है । विशेष तकनिक के आधार पर सी.पी.यू. के द्वारा निर्णय लिया जाता है कि इन प्रोग्राम मे से किस प्रोग्राम को चलाना हैएक ही समय मे सी.पी. यू. किसी प्रोग्राम को चलाता है

3) मल्टी प्रोसेसिंग

एक समय मे एक से अधिक कार्य के क्रियान्वयन के लिए सिस्टम पर एक से अधिक सी.पी.यू रहते है । इस तकनीक को मल्टी प्रोसेसिंग कहते है । एक से अधिक प्रोसेसर उपल्ब्ध होने के कारण इनपुट आउटपुट एवं प्रोसेसींगतीनो कार्यो के मध्य समन्वय रहता है ।

4) मल्टी टास्किंग

मेमोरी मे रखे एक से अधिक प्रक्रियाओ मे परस्पर नियंत्रण मल्टी टास्किंग कहलाता है किसी प्रोग्राम से नियत्रण हटाने से पहले उसकी पूर्व दशा सुरक्षित कर ली जाती है जब नियंत्रण इस प्रोग्राम पर आता है प्रोग्राम अपनी पूर्व अवस्था मे रहता है । मल्टी टास्किंग मे यूजर को ऐसा प्रतित होता है कि सभी कार्य एक साथ चल रहे है।

5) मल्टी थ्रेडिंग 

यह मल्टी टास्किंग का विस्तारित रूप है एक प्रोग्राम एक से अधिक थ्रेड एक ही समय मे चलाता है । उदाहरण के लिए एक स्प्रेडशिट लम्बी गरणा उस समय कर लेता है जिस समय यूजर आंकडे डालता है

6)रियल टाइम 

रियल टाइम आपरेटिंग सिस्टम की प्रक्रिया बहुत ही तीव्र गति से होती है रियल टाइम आपरेटिंग सिस्टम का उपयोग तब किया जाता है जब कम्पयुटर के द्वारा किसी कारेय विशेष का नियंत्रण किया जा रहा होता है । इस प्रकार के प्रयोग का परिणाम तुरंत प्राप्त होता है । और इस परिणाम को अपनी गरणा मे तुरंत प्रयोग मे लाया जाता है । आवशअयकता पडने पर नियंत्रित्र की जाने वाली प्रक्रिया को बदला जा सकता है । इस तकनीक के द्वारा कम्पयुटर का कार्य लगातार आंकडे ग्रहण करना उनकी गरणा करना मेमोरी मे उन्हे व्यवस्थित करना तथा गरणा के परिणाम के आधार पर निर्देश देना है